मुक्ति की चाबी
बदहाल रातों के लंबे सिलसिलों से गुजरने वाले एक खूबसूरत जहां में, परेशान थी आवाम। घर-द्वार के जवान, पढ़ें लिखे युवक-युवती को काम नहीं मिल रहा था। भटक रहें थे वह, दर-दर, काम की खोज में । कितनों ने तो आशा ही छोड़ दी है कि उन्हें उनके पढ़ाई-लिखाई की हैसियत का काम मिलेगा । वह बस जो भी मिला है उस काम पर टिके रहना चाहते हैं । कितनों को तो ऐसा आधा-अधूरा रोजगार भी नहीं मिला है और रोजगार पानें की कोई उम्मीद नहीं बचीं हैं । उस जहां में वैसे तो लगभग 10 लाख सरकारी नौकरी में पद खाली थें । सारे युवाओं की उम्मीद का एक मात्र अंतिम विकल्प था इन सरकारी नौकरी में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु अधिसूचना जारी हो जाएगी । इस जहां के चुनावी गणतंत्र के समयानुसार सार्वत्रिक चुनाव की आघोषणा का माहौल बना हुआ था । जहां के नेताओं में कुछ ऐसे नेता थे, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखते। ऐसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रोत्साहन देने वाले, जो नेता इतने समझदार थे, जो जानते थे की इन 10 लाख के करीब सरकारी रिक्त पदों पर युवा पीढ़ी के स्त्री-पुरुषों को नौकरी मिलने पर, केवल इन लोगों का समाधान नहीं होगा । हर परिवार ...